भारत में हिन्‍दूओं का पवित्र तीर्थस्‍थल वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Temple) है जो त्रिकुटा हिल्‍स में कटरा नामक जगह पर 1700 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के पिंड एक गुफा में स्‍थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, देवी वैष्‍णों इस गुफा में छिपी और एक राक्षस का वध कर दिया।

मंदिर का मुख्‍य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है। इस मंदिर की देखरेख की जिम्‍मेदारी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है। आंध्र प्रदेश के तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद इसी मंदिर में भक्‍तों द्वारा सबसे ज्‍यादा दर्शन किए जाते है। इस मंदिर में आने के लिए सबसे पहले कटरा पहुंचे  और वहां से चढ़ाई शुरू कर दें। यहां चढ़ाई रात के किसी भी पहर से शुरू की जा सकती है।

वैष्णो देवी मंदिर

वैष्णो देवी उत्तरी भारत के सबसे पूजनीय और पवित्र स्थलों में से एक है। यह मंदिर पहाड़ पर स्थित होने के कारण अपनी भव्यता व सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। वैष्णो देवी भी ऐसे ही स्थानों में एक है जिसे माता का निवास स्थान माना जाता है। हर साल लाखों तीर्थ यात्री मंदिर के दर्शन करते हैं।यह भारत में तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थस्थल है। वैसे तो माता वैष्णो देवी के सम्बन्ध में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं लेकिन मुख्य 2 कथाएँ अधिक प्रचलित हैं।

कहते हैं पहाड़ों वाली माता वैष्णो देवी सबकी मुरादें पूरी करती हैं। उसके दरबार में जो कोई सच्चे दिल से जाता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। ऐसा ही सच्चा दरबार है- माता वैष्णो देवी का। माता का बुलावा आने पर भक्त किसी न किसी बहाने से उसके दरबार पहुँच जाता है। हसीन वादियों में त्रिकूट पर्वत पर गुफा में विराजित माता वैष्णो देवी का स्थान हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं।

दंत

कथा मां के मानक रूप की कई कथाएं हैं, कहा जाता है कि मां का एक भक्त था श्रीधर, जो कि निर्धन था। मां के आशीष से उसने अपने गांव में एक भंडारा रखा जहां भैरवनाथ भी आया और उसने श्रीधर से कहा कि उसे मांस-मदिरा दो, जिस पर श्रीधर राजी नहीं हुआ। उस भंडारे में मां दुर्गा भी कन्या रूप में आयी थीं। उन्होंने भी भैरवनाथ को काफी समझाया, जिस पर भैरवनाथ को गुस्सा आ गया वो कन्या के पीछे भागा, कन्या बनीं मां वैष्णों पर्वत के गुफा में जाकर बैठ गईं जिसके कारण उस गुफा का नाम ‘अर्धक्वांरी’ पड़ा।

‘अर्धक्वांरी’

मां ने ‘अर्धक्वांरी’ गुफा में नौ महीने तपस्या की थी और भगवान हनुमान को कहा कि जब तक वो तपस्या करे तब तक वो भैरवनाथ से खेलें। गुफा के पास मां की चरण पादुका भी है।

‘बाणगंगा’

कहते हैं हनुमान जी को प्यास लगी थी तब मां ने बाण के जरिये त्रिकुट पर्वत से जलधारा निकाली और अपने बाल धोये, जिसके बाद वो जलधारा पीने योग्य हो गई इस कारण मंदिर के पास की जलधारा को ‘बाणगंगा’ कहते हैं।

भैरवनाथ

कहते हैं कि मां ने तपस्या के बाद भैरवनाथ ने उनसे युद्द किया था लेकिन भैरवनाथ ने उनसे क्षमा मांग ली थी जिस पर मां ने उसे माफ करते हुए आशीष दिया था मेरे किसी भी भक्त की पूजा तब तक पूरी नहीं होगी जब तक कि लोग मेरे दर्शन के बाद तुम्हारी पूजा नहीं करेंगे। इसलिए मां वैष्णो देवी के दर्शन के बाद लोग जरूर से भैरवनाथ के दर्शन करते हैं।

मां वैष्णो देवी

जिस जगह पर मां वैष्णो देवी ने हठी भैरवनाथ का वध किया, वह स्थान आज पूरी दुनिया में ‘भवन’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर मां काली (दाएँ), मां सरस्वती (बाएँ) और मां लक्ष्मी पिंडी (मध्य) के रूप में गुफा में विराजित है। इन तीनों के सम्मि‍लित रूप को ही मां वैष्णो देवी का रूप कहा जाता है।

मां वैष्णो देवी

यात्रा करने के लिए उचित समय : –  वैसे तो माँ वैष्णो देवी के दर्शनार्थ वर्षभर श्रद्धालु जाते हैं परंतु यहाँ जाने का बेहतर मौसम गर्मी है। सर्दियों में भवन का न्यूनतम तापमान -3 से -4 डिग्री तक चला जाता है और इस मौसम से चट्टानों के खिसकने का खतरा भी रहता है। अत: इस मौसम में यात्रा करने से बचें।

परिवहन: – कम समय में माँ के दर्शन के इच्छुक यात्री हेलिकॉप्टर सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। लगभग 2200 से 2800 रुपए खर्च कर दर्शनार्थी कटरा से ‘साँझीछत’ (भैरवनाथ मंदिर से कुछ किमी की दूरी पर) तक हेलिकॉप्टर से पहुँच सकते हैं।

इस तीर्थ-यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए अब उधमपुर से कटरा तक ट्रेन चलाई गई है। माता वैष्णोदेवी की यात्रा जम्मू के कटरा से शुरू होती है। कटरा एक गाँव है जो जम्मू से 50 किलोमीटर की दुरी पर है। जम्मू तक नेशनल हाइवे 1 A आता है। उत्तर भारत से आप टैक्सी या कार द्वारा जम्मू के कटरा आ सकते है। कटरा से चढाई शुरू होती है। बस द्वारा : कई बसे भारत के प्रमुख शहरों से खासकर उत्तर भारत से सीधे जम्मू आती है। जम्मू से कटरा 50 किलोमीटर टैक्सी इत्यादि करके आना पड़ता है। कुछ बसे सीधे कटरा भी आती है। हवाई जहाज : जम्मू में जम्मू एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट सबसे पास में है तथा कतरा से 50 किलोमीटर है। इस एयरपोर्ट पर भारत के सभी बड़े एयरपोर्ट से हवाई जहाज आते है।रेल द्वारा गर्मियों में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। तब दिल्ली से जम्मू के लिए विशेष ट्रैन चलाई जाती है। जम्मू में ब्राडगेज लाइन है। ऊधमपुर से भी कतरा तक रेल संपर्क है।

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