मेरू रिलीजन स्पॉट, कैलाश पर्वत (Meru religion spot Mount kailash)

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हिमालय पर्वत के उच्चतम श्रंखला में मानसरोवर में यह बहुत पवित्र जगह है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान महादेव स्वंय विराजमान हैं। यह धरती का केंद्र है। दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित कैलाश मानसरोवर के पास ही कैलाश और आगे मेरू पर्वत स्थित हैं। यह संपूर्ण क्षेत्र शिव और देवलोक कहा गया है। रहस्य और चमत्कार से परिपूर्ण इस स्थान की महिमा वेद और पुराणों में भरी पड़ी है।

कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22,068 फुट ऊंचा है तथा हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत में स्थित है। चूंकि तिब्बत चीन के अधीन है अतः कैलाश चीन में आता है, जो चार धर्मों- तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केंद्र है। कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सतलुज व करनाली।

Mount Meru (Sanskrit: मेरु), also recognized as Sumeru, Sineru or Mahameru, is the sacred five-peaked mountain of Hindu, Jain, and Buddhist cosmology and is considered to be the center of all the physical, metaphysical and spiritual universes.[1]

Meru to which is added the approbatory prefix su-, results in the meaning “Excellent Meru”, “Wonderful Meru” or “Great Meru”.

Many famous Hindu and similar Jain as well as Buddhist temples have been built as symbolic representations of this mountain. The “Sumeru Throne” 須彌座 xūmízuò style base is a common feature of Chinese pagodas. The highest point (the finial bud) on the pyatthat, a Burmese-style multi-tiered roof, represents Mount Meru.

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