भारत मे बिरला के प्रसिद्ध मंदिर का इतिहास और जानकारी | Birla Mandir Information

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बिरला मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मेट्रो के इस प्रमुख आकर्षण का निर्माण उद्योगपति जी. डी. बिरला द्वारा किया गया जो 1939 में पूर्ण हुआ और जिसका उद्घाटन महात्मा गाँधी ने किया। दिल्ली के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक यह मंदिर देवी लक्ष्मी (धन और संपत्ति की देवी) और नारायण (उनके पति और त्रिमूर्ति के पालक) को समर्पित है। इसके अलावा इस मंदिर के चारों ओर भगवान कृष्ण, शिव, गणेश, हनुमान और बुद्ध को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं। यहाँ देवी दुर्गा – शक्ति की देवी, को समर्पित एक मंदिर भी है। हिंदू मंदिर स्थापत्य कला की नगर शैली में बने इस मंदिर का निर्माण पंडित विश्वनाथ शास्त्री नाम के व्यक्ति के मार्गदर्शन में हुआ और इसके पूर्ण होने के बाद महात्मा गाँधी इसके उद्घाटन के लिए इस शर्त पर राज़ी हुए कि इस मंदिर में सभी धर्म और जातियों के लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कनॉट प्लेस के पास मंदिर मार्ग पर स्थित इस मंदिर तक परिवहन के सभी साधनों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है और सप्ताह में सात दिन सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है।

मंदिर में दोनों देवताओ की मूर्ति को बेहतरीन रूप से सजाया और आभूषित किया गया है। मंदिर के भीतर देवताओ की मूर्ति के अलावा प्राचीन शिलालेख, हिन्दू सिंबल, आभुषम और भित्तिचित्र भी देखने मिलते है।

मंदिर में कुल तीन डोम है, जो धर्म के तीन रूपों का प्रतिनिधित्व करते है। मंदिर के सबसे महत्वपूर्ण भागो में लक्ष्मी-नारायण की आकर्षक मूर्ति शामिल है, जो अखंड पत्थर से बनी हुई है। मंदिर की दूसरी मूर्तियों में भगवान गणेश की मूर्ति शामिल है।

मंदिर का इंटीरियर पौराणिक चित्रों और बहुत से हिन्दू देवताओ के चित्रों से किया गया है। मंदिर में एक विशाल मार्बल है, जहाँ सभी एतिहासिक-पौराणिक घटनाओ का उल्लेख किया गया है। मंदिर का बाहरी भाग भी मंदिर के आंतरिक भाग की तरफ सुंदर है, मंदिर तक पहुचने के लिए मार्बल की सीढियाँ भी बनायी गयी है। मंदिर में बहुत से हिन्दू देवी-देवताओ की कलाकृतियाँ और चित्र है। साथ ही मंदिर की दीवारों पर महान दर्शनशास्त्रियो और विद्वानों जैसे दी सोक्रेटस, क्राइस्ट, बुद्धा और ज़रथुस्त्र के चित्र भी बने हुए है।

1. लक्ष्मी नारायण मंदिर Delhi : लक्ष्मी नारायण मंदिर को बिरला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, जो दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक है और एक प्रमुख पर्यटन केन्द्र है। उद्योगपति जी. डी. बिरला द्वारा 1938 में निर्मित यह शानदार मंदिर कनॉट प्लेस की पश्चिम दिशा में स्थित है।

यह मंदिर लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) और नारायण (संरक्षक) को समर्पित है। इस मंदिर का उद्घाटन महात्मा गांधी द्वारा इस शर्त पर किया गया था कि इस मंदिर में सभी जाति के लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

कहां स्थित है: गोल मार्किट के नज़दीक,मंदिर मार्ग, कनॉट प्लेस
नज़दीकी मेट्रो स्टेशन: आर.के.आश्रम मार्ग
समय: प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक (दर्शन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातःकाल अथवा सायंकाल की आरती)
प्रवेश: निःशुल्क
बंद रहने के दिन: कोई नहीं
फोटोग्राफी: प्रार्थना भवन में अनुमति नहीं है

2. मंगल महादेव बिरला कानन (Mangal Mahadev Birla Kanan) : मंगल महादेव बिड़ला कानन मंदिर एक हिन्दू मंदिर है। जो शिवाजी मार्ग, रंगापुरी, नई दिल्ली में स्थिति है। मंगल महादेव बिरला कानन मंदिर भगवान शिव और अन्य देवी देवताओं के विशालकाय मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। ये लगभग 200 एकड़ जमीन में बना हुआ है, जहां असीम शांति की अनुभूति होती है। यह मंदिर जब दिल्ली से गुडगांव एनएच-8 से जाते है तो रास्ते में ही मंदिर को देखा जा सकता है तथा मंदिर में भगवान शिव की विशाल मूर्ति को राष्ट्रीय राज मार्ग एनएच-8 से देखा जा सकता है।

मंगल महादेव बिड़ला कानन मंदिर में भगवान शिव की विशाल मूर्ति है किसी उँचाई लगभग 100 फीट से ऊपर है। इस मंदिर भगवान शिव के अलावा माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी बैल, सीता राम, राधा कृष्ण और भगवान गणेश मूर्ति भी है। ये सभी मूर्तियां काफी विशाल और कांस्य की बनी हुई है। जिसके कारण मंदिर बहुत सुन्दर और अद्भूत लगता है। मंदिर परिसर में सफाई का काफी ध्यान रखा जाता है। मंदिर के दोनो तरफ बगीचे बने हुए है जिनके बीच में से मंदिर परिसर में जाने का रास्ता है। मंदिर में बगीचे बहुत सन्दुर बने हुए है। मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में भक्तों को मन और हृदय की शांति प्रदान की जाती है।

3.बिरला गीता मंदिर कुरूक्षेत्र  (Birla Gita Mandir) : बिरला मंदिर, जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि इस मंदिर को बिरला साम्राज्‍य के कर्ता- धर्ता स्‍वर्गीय जुगल बिरला द्वारा बनवाया गया है, इस मंदिर को 1952 में बनवाया गया था। बिरला मंदिर के बनने के बाद, यहां पुराने मंदिरों का उद्धार करवाया गया है और पर्यटकों के लिए नए पर्यटन स्‍थल बने है। काफी लंबे समय से, यह मंदिर कुरूक्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। इस मंदिर को शहर के पुराने हिस्‍से में बनाया गया है। जहां से लगभग ढाई किमी. की दूरी रेलवे स्‍टेशन और पास में ही ब्रह्म कुंड भी स्थित है। बिरला मंदिर, पूरी तरीके से संगमरमर का बना हुआ है और इसके पीछे के हिस्‍से में काफी हरियाली है।

बिरला मंदिर के बारे में रोचक तथ्य:

  • मंदिर के बाहरी भाग को सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से मिलकर बना गया है, जो मुगल शैली की याद दिलाता है।
  • इसके परिसर को बनाने में मकराना, आगरा, कोटा और जैसलमेर के कोटा पत्थर का उपयोग किया गया था।
  • मंदिर के अन्दर 3 ओर दो मंजिला बरामदे हैं और पिछले भाग में बगीचे और फव्वारे बने हैं।
  • यह मंदिर लगभग 7.5 एकड़ क्षेत्र में फैला है। जिसमे कई मंदिर, बड़े गार्डन और गीता भवन भी सम्मिलित है।
  • मंदिर में स्थापित मूर्तियों की नक्काशी आचार्य विश्वनाथ शास्त्री की अध्यक्षता में बनारस के लगभग 100 कुशल कारीगरों द्वारा की गई थी।
  • मंदिर में मौजूद मूर्तियों को जयपुर से लाए गए संगमरमर द्वारा निर्मित किया गया था।
  • मंदिर के गलियारे की सभी दीवारों पर देश के प्रसिद्ध ऋषियों, मुनियों, महापुरूषों एवं पराक्रमी राजाओं के जीवन-चरित चित्रित किए गये हैं।
  • मंदिर की दायीं ओर एक गीता भवन भी बना हुआ है, जिसमें भगवान् श्री कृष्ण की एक बड़ी मूर्ति स्थापित है और भगवान् कृष्ण द्वारा गीता मे दिए उपदशों को दीवारों पर बनी कलाकृतियों द्वारा दर्शाया गया हैं।
  • इस मंदिर का निर्माण हिन्दू उड़िया वास्तुशैली में किया गया हैं।
  • लक्ष्मी नारायण मंदिर का सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन आर.के.आश्रम मार्ग है।
  • मंदिर को रामनवमी, दिवाली एवं कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्वों के अवसर पर खूब सजाया जाता है। त्यौहार के दिनों में लाखों की संख्या में नर-नारी व बच्चे इस मंदिर को देखने आते हैं, जिसके कारण मंदिर में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती है।
  • मंदिर रोजाना सुबह 6 बजे खुलता है और रात्रि को 10 बजे बंद होता है।

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