भारत के उत्तरांचल राज्य के रुड़की शहर में Piran Kalar Sharif  उर्स का आयोजन होता है। मेले का आयोजन रूडकी के समीप ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर गांव में होता है। इस स्थान पर हजरत मखदूम अलाउदीन अहमद ‘‘साबरी‘‘ की दरगाह है। यह स्थान हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता का सूत्र है। यहां पर हिन्दु व मुसलमान मन्नते मांगते हैं व चादरे चढाते हैं। मेले स्थल पर दरगाह कमेटी द्वारा देश/विदेश से आने वाले जायरिनों/श्रद्वालुओं के लिये आवास की उचित व्यवस्था है। दरगाह के बाहर खाने पीने की अच्छी व्यवस्था उपलब्ध है। पिरान कालियार रूकी के शबीर शाहिब नामक सूफी संत की कब्र है। पिरान कालियार शरीफ दरगाह में विभिन्न धर्मों के लोगों से गहरा विश्वास और भक्ति है, एक सद्भाव और एकता विकसित करने के लिए, पिरान कालियार शरीफ दरगाह की, जिसे ‘सबीर पाक’ भी कहा जाता है, 10 किमी की दूरी पर स्थित है रुड़की से विश्वास यह है कि आप यहां जो भी प्रार्थना करते हैं, आप इसे प्राप्त करते हैं, और यह मुसलमानों के लिए सबसे अधिक दरगाह के बाद की मांग में से एक है। धार्मिक संप्रदायों के भले ही भक्त इस तीर्थयात्री केंद्र की यात्रा करें। यह न केवल मुसलमान है जो यहां जाते हैं, हिंदुओं को भी विश्वास है! आप हरिद्वार से अपनी आध्यात्मिक यात्रा को जारी रख सकते हैं और अपने अगले स्टॉप को बना सकते हैं, उनके बीच में केवल 20 किलोमीटर की दूरी कम है। यह शाम को सुबह 5.45 बजे से सुबह 6.30 बजे तक प्रार्थना करने के लिए खुला रहता है। इस दरगाह और कलियार गांव से भी बहुत कुछ इतिहास है।

पिरान कलियर शरीफ

गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा संचालित टूरिज् हाउस उपलब्ध है जिसमें आवास और खान-पान की व्यवस्था उपलब्ध है। डाकघर, पुलिस चौकी, दूरसंचार विभाग के पी 0 सी 0 ओ 0 कार्यरत है, पीने के पानी की व्यवस्था दरगामी समिति द्वारा की जाती है मेले का समय हैण्ड पम्पों की व्यवस्था और ततैया आदि सुविधा उपलब्ध है स्थानीय स्तर पर मेटाडोर द्वारा परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। रवीउल अब्बल, चंद्र के अनुसार मेले की आयोजन की तारीख तय की जाती है और मेला एक महीने तक चलता है। यहां पर प्रत्येक वर्ष उर्स का आयोजन होता है। उर्स की परम्परा सात सौ वर्षो से भी अधिक पुरानी है। इस अवसर पर यहां लाखों की संख्या में जायरीन (श्रद्धालु) देश व विदेश से आते हैं। पारम्पारिक सूफीयाना कलाम व कव्वालियां उर्स के समय यहां पर विशेष आकर्षण होता है। उत्तराखण्ड पर्यटन द्वारा वार्षिक उर्स मेले के आयोजन हेतु विगत वर्ष रू0 3.25 लाख की अनुदान धनराशि भी उपलब्ध कराई गई थी।

पिरान कलियर शरीफ

पिरान कलियर दरगाह, हरिद्वार से करीब 20 किलोमीटर दूर गंगा नदी के तट पर रुड़की शहर में स्थित है। यह दरगाह पूरे देश को मानवता और एकता का संदेश देती है। पीरान कलियर को कलियर शरीफ के नाम से भी जाना जाता है। यह सूफी संत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर की कब्र है। यहां हर वर्ष धार्मिक कार्यक्रम “उर्स” का आयोजन किया जाता है। मुस्लिम समुदाय के साथ साथ हिंदु धर्म के लोग भी यहाँ चादर चढ़ाते हैं तथा मन्नत मांगते है। रुड़की- कहते हैं ”मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है वही होता है जो मंजूर-ए-ख़ुदा होता है” जीहां वैसा ही इबादत गुजार बन्दों के पर्दा कर जाने के बाद उनकी दरगाह पर लोग अपनी परेशानियों से निजात की आशा लेकर पहुँचते हैं और दुआ प्रार्थना करते हैं और उनकी उम्मीदों की झोली भरती भी है ! इसी तरह कलियर शरीफ में लोगों की मुरादें पूरी होने के साथ ही यह ऐसी दरगाह जहाँ होती है जिन्न और भूत प्रेतों को सरेआम फाँसी और एक फकीर जिसके इशारे पर नाचते हैं दुनिया भर के भूत प्रेत और जिन्नात आज तक पता नही कितने लोगो को मिला है आसमानी बलाओं से छुटकारा जिनकी दरगाह में नाचते हैं भूत प्रेत और एक गूलर के खाने से बे औलाद को मिल जाती है औलाद । जीहां कलियर शरीफ स्थित साबिर पिया साहब की दरगाह में देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में ज़ाएरीन पहुँचते हैं ! माना जाता है कि साबिर की दरगाह में जो भी मन्नत मुरादे लेकर पहुँचते हैं व् उन्हें खाली हाथ नहीं लौटाते लेकिन साबिर की दरगाह में भुत प्रेत और जिन्नात आकर दरगाह में पटकियाँ खाते हैं ! आलम ये है कि हर रोज़ सेंकडो की संख्या में जिन्न, भुत,प्रेत के असर वाले लोग यहाँ पहुँचते है जिन्हें साबिर पहले तो सजा देते हैं और माफ़ी के बाद ही भूतो को छुटकारा मिल पाता है बड़ा से बड़ा भुत साबिर की दरगाह में आकर मजबूर हो जाता है|

पिरान कलियर शरीफ

इस जगह पर जो भूत प्रेत जिन्नात से बाधित होते हैं उन्हें लोग लेकर आते हैं लेकिन यहाँ कलियर शरीफ में भूत प्रेत या जिन्नात को एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है सबसे पहले इस तरह की परेसानी में फंसे आदमी को हजरत इमाम साहब की दरगाह में जाना पड़ता है जन्हा उसको एक लिखित शिकायत का पर्चा देना होता है इसके बाद शुरू होता है आसमानी बलाओं का इलाज यंहा से निकलने के बाद दूसरी दरगाह किलकलि साहिब की है वँहा सलाम के बाद मरीज को दो नहरो के बीच बनी दरगाह जिसको नमक वाला पीर के नाम से भी पुकारा जाता है वँहा जाना पड़ता है यंहा प्रसाद के रूप में नमक झाड़ू और कोडिया चढ़ाई जाती है जिनके बाद अगर किसी को कोई एलर्जी या चमड़ी का रोग हो तुरन्त आराम होता है ।
यंहा से निकलने के बाद चौथी दरगाह है साबरी बाग़ में अब्दाल साहब की वँहा सलाम के बाद शुरू होती है किसी भी ओपरी या पराई आफत की पिटाई और एक खास चीज दुनिया में सिर्फ क्लियर शरीफ ऐसी जगह है जन्हा जिन्नों को और भूतो को फाँसी दी जाती है ।और फाँसी के बाद इस बीमारी का अंत यंही हो जाता है ।सब कुछ दिमाग और कल्पनाओ से परे है पर सच है ।

परिवहन: – दरगाह क्षेत्र पहुंचने के लिए रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डे से घोड़ा तांगा और टैंपू से यहां पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा नगर पालिका के पास से यहां के लिए मैटाडोर और घोड़ा तांगा, थ्री व्हीलर, रिक्शा आदि वाहन चलते हैं।

मैटाडोर का किराया रेलवे स्टेशन से -15 रुपये प्रति सवारी
मैटाडोर का किराया पालिका से -7 रुपये प्रति सवारी
घोड़ा तांगा का रेलवे स्टेशन से – 20 रुपये
घोड़ा तांगा का पालिका से – 10 रुपये प्रति सवारी

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.